जीएसटी परिषद की बैठक में चौकाने वाले आंकडे ….उत्तराखंड राज्य को हुआ नुकसान

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41वीं जीएसटी0 परिषद की गुरूवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक हुई … बैठक में वित्त मंत्री भारत सरकार निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई राज्य का प्रतिनिधित्व कृषि मंत्री श्री सुबोध उनियाल, उत्तराखण्ड सरकार द्वारा किया गया

राज्य बनाने के दौरान उत्तर प्रदेश से करीब 4430 करोड़ का उत्तराखंड को कर्ज मिला..लेकिन अब यह कर्ज बढ़कर 71 हजार 500 करोड़ हो गया है.. भारत सरकार की जीएसटी काउंसिल की बैठक के दौरान गुरुवार कर्ज का यह ताजा डाटा राज्य सरकार की तरफ से काउंसिल को दिया गया है। यही जब तक जीएसटी लागू नहीं था तो उत्तराखंड का ग्रोथ रेट टैक्ससेशन रेवन्यु 17 फ़ीसदी था लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद उत्तराखंड का ग्रोथ रेट टैक्ससेशन रेवन्यु में 3 फ़ीसदी का नुकसान हुआ है

सब से महत्वपूर्ण बात कि प्रदेश को इतने बड़े कर्ज के एवज में करीब 5800 करोड रुपए महज ब्याज के ही चुकाने पड़ रहे हैं.. यानी उत्तराखंड की कुल जीडीपी का 2.1% राज्य कर्जे के ब्याज को चुकाने में ही खर्च कर रहा है। उधर कॉल करने की बात करें तो यह प्रदेश की जीडीपी का 24.36% है। कर्जे से राज्य की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि अब राज्य सरकार ने लगातार हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए और कर्जा वहन न कर पाने की बात कह दी है.. जीडीपी काउंसिल के सामने राज्य सरकार के प्रतिनिधियों ने प्रदेश की वित्तीय हालतों की जानकारी दी और जीएसटी लागू होने के बाद राज्य को हो रहे नुकसान की भी जानकारी दी।

उत्तराखंड की तरफ से बैठक की अध्यक्षता कर रहे कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने बताया कि उत्तराखंड को जीडीपी लागू होने के बाद करीब 3% का नुकसान हो रहा है। ऐसे में राज्य सरकार ने खुद को लोन लेने की स्थिति से बाहर बता दिया है। हालांकि जीएसटी काउंसिल ने सरकार को दो विकल्प दिए हैं जिसमें उत्तराखंड में भारत सरकार के जीएसटी द्वारा ही लोन लेने और सेस को बढ़ाकर इससे राज्य द्वारा लोन की वापसी करने पर विचार किया है। साफ है कि आज हुई जीएसटी की बैठक के बाद उत्तराखंड में वित्तीय रूप से खराब हो रहे हालातों को जीएसटी काउंसिल भी जान गया है।

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