डिमरी पंचायत ने भी देवस्थानम बोर्ड के मामले में सीएम तीरथ के फैसले का किया स्वागत,

डिमरी धार्मिक डिम्मर उमट्टा पंचायत की बैठक में मुख्यमंत्री द्वारा देवस्थानम बोर्ड को भंग करने पर पुनर्विचार व देवस्थानम बोर्ड से 51 मंदिरों को मुक्त करने के बयान का स्वागत किया गया है। डिमरी पंचायत के अध्यक्ष आशुतोष डिमरी ने मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के देवस्थानम बोर्ड से 51 मंदिरों को मुक्त करने व देवस्थानम बोर्ड पर पुनर्विचार करने के फैसले का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री का आभार प्रकट किया। बैठक को संबोधित करते हुए डिमरी ने कहा कि सूबे के सीएम ने पुजारियों, पंडा पुरोहितों, व हक हकूक धारियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए पौराणिक व्यवस्था व पारंपरिक रीति रिवाज पर विश्वास प्रकट किया है। इससे यह स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत धार्मिक मामलों में पौराणिक व्यवस्था मान्यता व पारंपरिक रीति रिवाज को सही ढंग से जानते हैं। बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि बद्रीनाथ मंदिर का प्रबंधन प्राचीन काल में हक हकूक धारियों के अनुरूप फिर से उन्हें सौंपा जाना चाहिए। यहां इस बात का उल्लेख करना जरूरी है कि ब्रिटिश सरकार के समय 1939 से पहले बद्रीनाथ मंदिर का प्रबंधन पुजारी समुदाय डिमरियों समेत अन्य मंदिर से जुड़े हक हकूक धारियों के पास था। जिसके तहत वजीर व लेखवार जैसे महत्वपूर्ण पद डिमरी समुदाय के पास प्राचीन काल में बद्रीनाथ मंदिर में थे। पंचायत अध्यक्ष आशुतोष डिमरी ने कहा कि लंबे समय तक वजीर, लेखवार व रावल के रसोया जैसे पद पर लंबे समय तक डिमरी समुदाय के लोगों ने सफलता पूर्वक कार्य का संचालन किया। लेकिन मंदिर पर सरकारी नियंत्रण व हस्तक्षेप के चलते प्राचीन परंपराओं को दरकिनार करते हुए यह पद छीने गए। बैठक में कोविड की गाइडलाइन के तहत 29 अप्रैल से बद्रीनाथ धाम के तेल कलश यात्रा को भव्य तरीके से दो चरणों में बद्रीनाथ धाम पहुंचाने की योजना पर भी विचार विमर्श हुआ।
बैठक में पंचायत के उपाध्यक्ष कमलेश डिमरी, सुरेश डिमरी, पंकज डिमरी, संजय डिमरी, राम प्रसाद डिमरी शास्त्री, हर्षवर्धन डिमरी, प्रकाश चंद डिमरी, राकेश चंद डिमरी, आचार्य विजय राम डिमरी, प्रनवेन्द्र प्रसाद डिमरी आदि लोगों ने अपने विचार प्रकट किए बैठक की अध्यक्षता अध्यक्ष आशुतोष डिमरी ने की।


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